देवास
देवास सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।। ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।। या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। इंदौर से लगभग पैंतीस किलोमीटर पर स्थित बसा एक प्राचीन शहर है देवास, देवास का अर्थ है, देव का वास। माता की टेकरी पर यह शाब्दिक अर्थ बिल्कुल सही बैठता है। शायद माता के वास की वजह से ही यह नाम पड़ा हो। वैसे देवास शहर के अपने कई चेहरे हैं और हर चेहरा अपना एक अलग व्यक्तित्व रखता है, लेकिन मैं यहाँ सबसे पहले माता की टेकरी से ही अपनी बात प्रारंभ करूँगा। जैसे जैसे हम माँ के इस स्थान के संम्बध में जानने की कोशिश करते हैं, रहस्य परालौकिक और अविश्वसनीय दुनिया में उतरते चले जाते हैं। इंदौर ने जैसे अपने वृहत होने का सारा बोझ अपने सीने पर उठा रखा हो। तो वो आपाधापी, बेलगाम होते ट्रैफिक से उपजा पॉल्यूशन देवास में बनिस्बत कम है। तो अभी भी आपको वो सत्तर अस्सी के दशक की आत्मीयता, खुलापन एवं एक ठहराव यहां मिल जाता है, जो कभी इंदौर में पाया जाता थ...