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महाकाल मेंगो फॉर्म, जबलपुर

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  महाकाल मेंगो फॉर्म ज ब ल पु र इन दिनों बाज़ार में रसीले और स्वादिष्ट दशहरी, चोसा, सफेदा, और बादाम जैसे आमों की बहार आई हुई है।  यूं तो हिन्दुस्तान में फलों की बहुतायत हैं किंतु जिस एक फ़ल का इंतज़ार सभी को रहता है वह है फलों का राजा आम।  आम को " फलों का राजा" के खिताब से यूं ही नहीं नवाज़ा गया, इसका अद्भुत स्वाद केवल ज़बान तक ही नहीं रहता बल्कि आत्मा को सुकून पहुंचाता है और तब इसकी महत्ता सिद्ध हो जाती है। हिंदुस्तान में आम को राष्ट्रीय फल का दर्जा प्राप्त है एवं 22 जुलाई 2025 का दिन राष्ट्रीय आम दिवस है।  तो आज चखते हैं "महाकाल मेंगो फॉर्म" के अद्भुत आमों को, जहां उगाया जाने वाला मियाज़ाकी आम अनंत सत्ता के स्वामी शिव को भी बहुत पसंद है। साहित्य को आसान भाषा में जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से एवं रोचक ब्लॉग की श्रृंखला ज़ारी रखते हुए इस बार आमों के मौसम में जबलपुर में स्थित एक अद्भुत आम के बगीचे का भ्रमण कर लिया जाए। जबलपुर शहर की मैं यदि बात करूं तो एक ओर यह शहर बुंदेलखंड की नायाब रवायतों और परंपराओं से ओतप्रोत है जिसके प्रमाण  वीरांगना रानी दुर्गावती द्वारा...

लोटस वैली...

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कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥  श्रीमद्भगवद्गीता 2.47 श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं, “तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करना ही है| कर्मों के फल पर तुम्हारा अधिकार नहीं है| अतः तुम निरन्तर कर्म के फल पर मनन मत करो और अकर्मण्य भी मत बनो।” कृष्णार्पण  "श्री कृष्ण को सादर समर्पित" मैं अपने कर्म श्री कृष्ण को समर्पित करता हूँ।   लोटस वैली (शहर की भीड़ भाड़ के बीच प्रकृति का एक छुपा खजाना )     अब अगर मैं आपसे यह कहूं की यह नयनाभिराम स्थान इंदौर से महज़ पंद्रह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है तो शायद आपको विश्वास ना हो लेकिन वे उत्साही पर्यटक जिनके लिए रोजमर्रा की दिनचर्या से कुछ वक्त चुरा कर कुछ नया एक्सप्लोर करना एक शौक़ बन चुका है या फिर वे उत्साही कपल जिन्होंने यहां प्री वेडिंग शूट करवाया है, वे इस जगह के बारे में अच्छी तरह जानते हैं। जी हां, यह जगह है लोटस वैली...    तो साहब यदि आप प्रकृति के इस छुपे खजाने का लुत्फ़ लेना चाहते हैं तो आपको सुबह ज़रा जल्द उठ कर याने सूर्योदय से थोड़ा पहले यह...

उफ्फ, ये बड़े शहर...

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बैंगलोर   (Pintrest images) (सभी फोटो : सैमसंग J 7) 19 फरवरी 2023 मैं जबलपुर से बस का छह घंटों का सफर तय कर रात आठ बजे नागपुर एयरपोर्ट पहुंचा, और वहां से दस बजे की फ्लाइट पकड़ कर अभी अभी बैंगलोर पहुंचा हूं।” रात के बारह बजे बंगलौर एयरपोर्ट से मैंने परितोष को फोन किया, “तुम मुझे लेने नहीं आए ?” “पापा आप फलाने नंबर वाली बस पकड़ कर फलाने स्टॉप तक आ जाना। मैं वहां से आपको पिक कर लूंगा।” मुझे उस पर बहुत गुस्सा आया। मैं पिछले बारह घंटों से सफर कर रहा हूं। कम से कम वह एयरपोर्ट तक जाता तो मुझे थोड़ी खुशी मिलती। ओह्ह्ह !! इस बालक ने तो अपनी मूलभूत परंपराओं को ही विस्मृत कर दिया है। खैर हो सकता है वह व्यस्त हो। कोई बात नहीं। मैंने उसकी बताई हुए बस पकड़ी और कंडक्टर के सामने टिकिट के लिए अंदाज़ से सौ रुपए बढ़ा दिए। उसने यह देख कर पहले कन्नड में कुछ कहा फिर हिन्दी में कहा, “ सिर्फ इतना ? और दो..” “और कितना ?” इतने रुपए में तो हम अपने शहर से दूसरे शहर पहुंच जाते हैं।’ मैंने मन ही मन सोचा। “दो सौ पचास और।” “अरे मुझे बंगलौर सिटी जाना है दूसरे शहर नहीं।”  “बस उतना ही लगेगा।” उसने मेरी बात को ...