उफ्फ, ये बड़े शहर...
बैंगलोर (Pintrest images) (सभी फोटो : सैमसंग J 7) 19 फरवरी 2023 मैं जबलपुर से बस का छह घंटों का सफर तय कर रात आठ बजे नागपुर एयरपोर्ट पहुंचा, और वहां से दस बजे की फ्लाइट पकड़ कर अभी अभी बैंगलोर पहुंचा हूं।” रात के बारह बजे बंगलौर एयरपोर्ट से मैंने परितोष को फोन किया, “तुम मुझे लेने नहीं आए ?” “पापा आप फलाने नंबर वाली बस पकड़ कर फलाने स्टॉप तक आ जाना। मैं वहां से आपको पिक कर लूंगा।” मुझे उस पर बहुत गुस्सा आया। मैं पिछले बारह घंटों से सफर कर रहा हूं। कम से कम वह एयरपोर्ट तक जाता तो मुझे थोड़ी खुशी मिलती। ओह्ह्ह !! इस बालक ने तो अपनी मूलभूत परंपराओं को ही विस्मृत कर दिया है। खैर हो सकता है वह व्यस्त हो। कोई बात नहीं। मैंने उसकी बताई हुए बस पकड़ी और कंडक्टर के सामने टिकिट के लिए अंदाज़ से सौ रुपए बढ़ा दिए। उसने यह देख कर पहले कन्नड में कुछ कहा फिर हिन्दी में कहा, “ सिर्फ इतना ? और दो..” “और कितना ?” इतने रुपए में तो हम अपने शहर से दूसरे शहर पहुंच जाते हैं।’ मैंने मन ही मन सोचा। “दो सौ पचास और।” “अरे मुझे बंगलौर सिटी जाना है दूसरे शहर नहीं।” “बस उतना ही लगेगा।” उसने मेरी बात को ...