महाकाल मेंगो फॉर्म, जबलपुर

 महाकाल मेंगो फॉर्म

ज ब ल पु र



इन दिनों बाज़ार में रसीले और स्वादिष्ट दशहरी, चोसा, सफेदा, और बादाम जैसे आमों की बहार आई हुई है। यूं तो हिन्दुस्तान में फलों की बहुतायत हैं किंतु जिस एक फ़ल का इंतज़ार सभी को रहता है वह है फलों का राजा आम।  आम को "फलों का राजा" के खिताब से यूं ही नहीं नवाज़ा गया, इसका अद्भुत स्वाद केवल ज़बान तक ही नहीं रहता बल्कि आत्मा को सुकून पहुंचाता है और तब इसकी महत्ता सिद्ध हो जाती है।

हिंदुस्तान में आम को राष्ट्रीय फल का दर्जा प्राप्त है एवं 22 जुलाई 2025 का दिन राष्ट्रीय आम दिवस है। 

तो आज चखते हैं "महाकाल मेंगो फॉर्म" के अद्भुत आमों को, जहां उगाया जाने वाला मियाज़ाकी आम अनंत सत्ता के स्वामी शिव को भी बहुत पसंद है।

साहित्य को आसान भाषा में जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से एवं रोचक ब्लॉग की श्रृंखला ज़ारी रखते हुए इस बार आमों के मौसम में जबलपुर में स्थित एक अद्भुत आम के बगीचे का भ्रमण कर लिया जाए।

जबलपुर शहर की मैं यदि बात करूं तो एक ओर यह शहर बुंदेलखंड की नायाब रवायतों और परंपराओं से ओतप्रोत है जिसके प्रमाण वीरांगना रानी दुर्गावती द्वारा अंग्रेजों से युद्ध के दौरान शहीद होने के "शहीदी स्थल" के रूप में मिलते हैं तो दूसरी ओर यह स्थान आध्यात्मिक ऊर्जा से भी भरपूर है जिसके प्रमाण पुराणों में जाबाली ऋषि के जिक्र के रूप में एवं पावन नदी नर्मदाजी के तटों पर स्थित प्राचीन मंदिरों के रूप में मिलते हैं।

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महाकाल मेंगो फॉर्म…

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जो मित्र एवं परिचित जबलपुर में रहते हैं, वे महाकाल मेंगो फॉर्म से भली भांति परिचित होंगे और अगर यदि नहीं भी हुए है तो कोई बात नहीं, अब हो जायेंगे।

प्यार और धन के प्रतीक आम को भारत में 4,000 से अधिक वर्षों से उगाया जा रहा है। यह भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस का राष्ट्रीय फल है। दुनिया भर में आम की 500 से अधिक किस्में पाई जाती हैं। जापानी आम, मियाज़ाकी, दुनिया का सबसे महंगा आम है, जिसकी कीमत लगभग 2.75 लाख रुपये प्रति किलोग्राम है। (इंटरनेट से साभार।)

शहर से लगभग अठारह किलोमीटर भेड़ाघाट की ओर स्थित महाकाल मेंगो फॉर्म, गर सीधे शब्दों में कहे तो एक आम का विशाल बगीचा है लेकिन यहां पैदा होने वाले आम, आम नहीं खास हैं। यहां उगाए जाने वाले आम विदेशों को निर्यात किए जाते हैं। सबसे सस्ते आम छह सौ रुपए प्रति किलों पर उपलब्ध हैं, वहीं सबसे महंगे आमों की किस्मों का मूल्य दो, ढाई लाख रुपए किलों है। वृहताकार आमों में किसी किसी का वज़न आधे से पौन किलों तक होता है। आमों को हवाई जहाज के रास्ते भेजा जाता है। हर डब्बे पर उसे खोलने की तारीख लिखी होती है। आतुरता से प्रतीक्षारत ग्राहकों को पके, सुगंधित और रसीले आम मिलते है। 

महाकाल मेंगो फॉर्म में जापान और दूसरे देशों से लाए गए पौधे है जिन्हें जबलपुर का वातावरण शायद इतना भा गया है कि वे यहां खूब फूल,फल और फैल रहे हैं। पेड़ की सामान्य ऊंचाई पांच छह या ज़्यादा से ज्यादा सात फुट है। कुछ आम अपने वज़न की वज़ह से धरती को चूमते प्रतीत होते हैं।

वास्तव में यहां के ऑनर धन्यवाद के पात्र है जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से जबलपुर का नाम विश्व पटल पर ला खड़ा किया है। चारों ओर आमों से लदे फ़दे पेड़ों के बीच घूमना आपको आनंद से भर देता है।

पार्क में आमों की सुरक्षा के लिए दिन में चौकीदार है और रात की चौकीदारी कुत्ते करते हैं। शहर से आने वाले विभिन्न समूहों के लिए पार्टी या पिकनिक का आयोजन किया जा सकता है। एक कैंटीन जहां भुगतान पर चाय नाश्ता और खाना मिल जाता है।

जब मैंने इसे देखा तभी मैं इस पर एक ब्लॉग बनाने पर विचार कर रहा था, इस कर के कि इस महत्वपूर्ण स्थान के बारे में आपको जानकारी अवश्य होनी चाहिए। तो अपनी पर्यटन स्थलों की सूची में इसे जोड़ना न भूलें।

(नीचे कुछ फोटो में परिवार जन आम के बाग में आमों का सानिध्य प्राप्त कर आनंदित होते हुए ...)















(ऊपर, जापान का मियाज़ाकी आम )



( अपनी पालनहार धरती को स्पर्श कर स्नेह का इज़हार करते हुए आम फल )






फिलहाल के लिए इतना ही,

जय महाकाल

हर हर महादेव…

नर्मदे हर..

नशे से दूर रहते हुए जीवन का नशा करते हुए आनंद से रहें…

कार चलाते वक्त सीट बेल्ट अवश्य बांधे…

फिर मिलते हैं किसी और रोचक ब्लॉग में…या फिर कहानियों, उपन्यास की किसी रोचक श्रृंखला में...


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