पांडिचेरी, एक अनोखा शहर...
पांडिचेरी / पुदुच्चेरी बैंगलौर से रात नौ बजे या शायद दस बजे एक वातानुकूलित बस में प्रवेश करने के पश्चात दूरी का भान नहीं रह जाता न समय का। सुबह जब आँख खुलती है, तो मैं अपने आप को पांडिचेरी में पाता हूँ। हर शहर की एक खास बात होती है। कभी कभी यह “ख़ास बात” दिखती भी नहीं, इसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। पुदुच्चेरी तो बस एक आर्ट है। यदि महसूस किया जाए तो यह बहुत कुछ कहता है। जीने की जद्दोजहद से दूर आत्मीय शान्ति अपने आप मे समेटे यह आपको भी आनंद से भर देता है। कुछ ऐसी बाते हैं जिससे महर्षि अरविंद का यह शहर बाकी शहरों से अपनी अलग एक शख्सियत बनाए रखने में सफल रहा एवं बड़ी विनम्रता से अपनी कामयाबी के साथ जी लेता है। यदि आप इसे समझना चाहते हैं, तो आपको इससे जुड़ना होगा। पुदुच्चेरी एक केंद्र शासित प्रदेश है। 20 सितंबर 2006 को इसका नाम पॉन्डिचेरी से पुदुच्चेरी में बदल दिया गया। भारतीय, दक्षिण भारतीय, फ्रेन्च और अंग्रेजी संस्कृति का एक सुरूचिपूर्ण मिश्रण एक जगह पर देखना हो तो पॉन्डिचेरी से बढ़ कर दूसरा स्थान संम्पूर्ण भारत में नहीं है। विशा...