लोटस वैली...

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ 
श्रीमद्भगवद्गीता 2.47
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं, “तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करना ही है| कर्मों के फल पर तुम्हारा अधिकार नहीं है| अतः तुम निरन्तर कर्म के फल पर मनन मत करो और अकर्मण्य भी मत बनो।”
कृष्णार्पण 
"श्री कृष्ण को सादर समर्पित"
मैं अपने कर्म श्री कृष्ण को समर्पित करता हूँ।

 लोटस वैली

(शहर की भीड़ भाड़ के बीच प्रकृति का एक छुपा खजाना )








 

 




अब अगर मैं आपसे यह कहूं की यह नयनाभिराम स्थान इंदौर से महज़ पंद्रह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है तो शायद आपको विश्वास ना हो लेकिन वे उत्साही पर्यटक जिनके लिए रोजमर्रा की दिनचर्या से कुछ वक्त चुरा कर कुछ नया एक्सप्लोर करना एक शौक़ बन चुका है या फिर वे उत्साही कपल जिन्होंने यहां प्री वेडिंग शूट करवाया है, वे इस जगह के बारे में अच्छी तरह जानते हैं।

जी हां, यह जगह है लोटस वैली...  







तो साहब यदि आप प्रकृति के इस छुपे खजाने का लुत्फ़ लेना चाहते हैं तो आपको सुबह ज़रा जल्द उठ कर याने सूर्योदय से थोड़ा पहले यहां पहुंचना होगा।
ताज़ा खिले कमल के फूलों के बीच बोटिंग का अपना अलग ही मज़ा है। ग्रुप में या फिर परिवार के साथ यह स्थान आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरता है। 








तो कुछ देर लोटस वैली में बिता कर, ताज़गी भर कर लौट आइए फिर इंदौर की रौनक में।लौटते वक्त आप पित्रेश्वर हनुमान मंदिर में बिराजे "बैठे हनुमान जी" के दर्शन लाभ ले कर अपनी ट्रिप को यादगार बना सकते हैं।


फिलहाल के लिए इतना ही। पर्यटन और साहित्य का दौर यूं ही चलता रहेगा। आगे आप पढ़ेंगे कुछ कहानियां, ‘कथा साहित्य’ भाग में... 

आपका आनंद सदैव बना रहे,
हंसते मुस्कुराते रहिए,
और 
ज़िन्दगी का नशा कीजिए..
कार ड्राइव करते वक्त सीट बेल्ट बांधना ना भूले।
आप पढ़ रहे हैं...आपकी यह आदत बेहतर है...

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